सीहोर/ पिछले दिनों सीहोर में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने सीहोर के आराध्य देव भगवान गणेश मंदिर भगवान श्री गणेश की आराधना करने पधारे थे, भारतीय जनता पार्टी के नेताओ के पेट में दर्द उठा और भारतीय जनता पार्टी ने श्री दिग्विजय सिंह की शिकायत चुनाव आयोग में कर दी, श्री गणेश मंदिर के बाहर कई दुखी लोग मांग कर अपना जीवन यापन करते है।
युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजीव गुजराती ने कहा है कि हमारे सनातन धर्म मे मंदिर के बाहर धर्म करने की प्रथा है, दान धर्म की शिकायत करकर भाजपा ने हिन्दू सनातन धर्म का अपमान किया है और ये मामला भारतीय जनता पार्टी की संक्रिण मानसिकता को प्रदर्शित करता है, भाजपा की इस ओछे कृत्य का जवाब निश्चित रूप से जनता देगी युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजीव गुजराती ने भाजपा नेताओ के इस कृत्य की निंदा करते हुए भाजपा नेताओं से माफी मांगने की अपील की है और भाजपा नेताओं को शिखवे शिकायतों को छोड़कर भाजपा सांसद के पिछले कार्यकालों का हिसाब जनता को देना चाहिए ।
मंगलवार, 2 अप्रैल 2019
दिग्विजय सिंह जी की शिकायत भाजपा की ओछी मानसिकता
छत्तीसगढ़ के सीएम ने पीएम को भेजा आईना
छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेता और सीएम भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ऑनलाइन ऑर्डर के जरिए बतौर तोहफा एक आईना भेजा है. बघेल ने अपने ट्वीट में आईने के ऑनलाइन ऑर्डर का स्क्रीनशॉट लगाया है. इस आईने को पीएम के आवास 7, लोक कल्याण मार्ग, नई दिल्ली को भेजा गया है.
बघेल ने ट्वीट किया है कि 'मैं आपको यह आईना तोहफा स्वरूप भेज रहा हूं. इस आईने को आप लोक कल्याण मार्ग के अपने आवास में किसी ऐसी जगह लगाएं, जहां से आप सबसे अधिक बार गुजरते हों. ताकि इस आईने में अपनी शक्ल बार-बार देख आप अपने असली चेहरे को पहचानने की कोशिश कर सकें.'
भूपेश बघेल का खत पीएम मोदी के नाम
माननीय मोदी जी!
आपको मोदी जी तो बोल ही सकता हूं ना? दरअसल क्या है कि आपने ख़ुद को इतने नाम दे रखे हैं कि लोग भ्रमित हो जाते हैं कि आपको किस नाम से पुकारें. चायवाला, फकीर, प्रधान सेवक, चौकीदार, साहेब, और न जाने क्या-क्या!
आप स्वतंत्र भारत के पहले ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनके कई चेहरे हैं. जो कि अपनी सुविधानुसार उन चेहरों का मतदाताओं को लुभाने के लिए इस्तेमाल करता है. लेकिन इनमें से आपका असली चेहरा है कौन सा?
आप 2014 में चायवाला बन गए. आपकी पीआर टीम ने आपकी इस छवि को खूब बेचा और वोट बटोरा. लेकिन अब तक इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि आपने चाय की केतली को हाथ तक लगाया हो. अब जब आपने चाय बेची ही नहीं तो आप चायवाला कैसे हो गए मोदी जी?
फिर भारत को दस लाख का सूट पहनने वाला पहला फकीर भी मिला. एक ऐसा फकीर जिसके बारे में कहा जाता है कि मेकअप में ही हजारों रुपए खर्च कर दिए जाते हैं. आपकी कलम, दिन में कई बार बदले जाने वाले आपके कपड़े, आपका नाश्ता और आपका खाना सबकी बड़ी चर्चा होती रही है. 2000 करोड़ तो आपने विदेश यात्राओं में ही फूंक दिए और 4600 करोड़ रुपए विज्ञापनों में. आपकी इस फकीरी को देखकर तो अच्छे अच्छे फकीरों के होश फ़ाख़्ता हो जाएं.
बात सिर्फ इन 'विशेषणों' तक सीमित नहीं है मोदी जी. 2014 के पहले आप काला धन विरोधी थे, भ्रष्टाचार विरोधी थे, जीएसटी विरोधी थे, पाकिस्तान को 'लव लेटर' लिखे जाने के खिलाफ थे, चीन को आप लाल आंखें दिखाना चाहते थे, गंगा मां के बेटे थे, स्मार्ट सिटीज और आदर्श गांवों का सपना बेचने वाले राजनेता थे, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के सच्चे समर्थक थे. लेकिन 2014 के बाद से ही इन सबके विपरीत होते चले गए. काले धन वालों को आपने विदेश भगा दिया, राफेल में अनिल अंबानी के साथ भ्रष्टाचार के भागीदार बन गए, आधी रात में संसद खुलवाकर जीएसटी बिल पास करवाया लेकिन इससे देश के कारोबार की कमर टूट गई, गंगा नदी की स्थिति अब भी दयनीय है, बेरोजगारी ने सारे रिकार्ड्स ध्वस्त कर दिए हैं, आप बिन बुलाए पाकिस्तान जाकर बिरयानी खा आए, चीन के राष्ट्रप्रमुख के साथ आप झूला झूलते दिखे, बनारस को क्योटो बनाना तो 'हर खाते में 15-15 लाख' जैसा जुमला ही साबित हुआ.
लोग पहचान ही नहीं पा रहे हैं कि आपका असली चेहरा कौन सा है. क्या आपको याद है कि आपका असली चेहरा कौन सा है?
इससे पहले कि आप झूठ का एक और नकाब पहन कर जनता के बीच आएं, मैं आपको यह आईना तोहफा स्वरूप भेज रहा हूं. मोदी जी! इस आईने को आप लोक कल्याण मार्ग के अपने आवास में किसी ऐसी जगह लगाएं, जहां से आप सबसे अधिक बार गुजरते हों. ताकि इस आईने में अपनी शक्ल बार बार देख आप अपनी असली चेहरे को पहचानने की कोशिश कर सकें.
हो सकता है कि आप इस आईने का इस्तेमाल ही ना करें. प्रधानमंत्री निवास के किसी कूड़ेदान में फेंक दें. लेकिन आईना देखने से आप फिर भी नहीं बच पाएंगे. इस देश की 125 करोड़ की आबादी इस चुनाव में आपको आईना दिखाने वाली है.
तैयार हैं ना मोदी जी?
लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी
नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव के लिए
अपनी पार्टी का घोषणा पत्र जारी कर दिया है. इस दौरान यूपीए चेयरपर्सन
सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री एके
एंटनी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी सहित पार्टी के पार्टी के वरिष्ठ
नेता मौजूद थे. घोषणा पत्र जारी करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने
कहा कि जब हमने एक साल पहले घोषणा पत्र को लेकर प्रक्रिया शुरू की थी तो
मैंने पी. चिदंबरम और राजीव गौड़ा को दो बातें कही थीं. मैंने कहा था कि यह
बंद कमरे में बनाया हुआ घोषणा पत्र नहीं होना चाहिए. इसमें भारत के लोगों
की बातें होनी चाहिए. दूसरी यह सच्चाई पर आधारित होना चाहिए, इसमें एक भी
बात झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए. कमेटी ने इन दोनों बातों पर अच्छे से काम किया है.
राहुल गांधी के भाषण की 10 बातें
- कांग्रेस गरीबी पर वार के लिए काम करेगी. गरीब लोगों को सालाना 72 हजार रुपए दिए जाएंगे. यह पैसा सीधे गरीबों और किसानों की जेब में जाएगा. पहली बार ऐसा होगा कि गरीबों की जेब में सीधा पैसा दिया जाएगा. पीएम मोदी सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी लागू करके अर्थव्यवस्था की धज्जियां उड़ा दी हैं, इससे इकॉनमी दोबारा जंप स्टार्ट हो जाएगी.
- देश में रोजगार और किसान दो बड़े मुद्दे हैं. देश में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है. पीएम मोदी ने दो करोड़ नौकरियों का वादा किया था. मैंने हमारी कमेटी से पूछा कि सच्चाई क्या है? सच्चाई यह है कि 22 लाख पद सरकारी नौकरी में खाली हैं.
- कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई तो मार्च 2020 तक उन पदों को भर देगी. इसके अलावा 10 लाख युवाओं को ग्राम पंचायतों में रोजगार दिया जा सकता है.
- मेक इन इंडिया के तहत जो भी युवा एंटरप्रन्योर बनना चाहता है, उसे अभी बहुत सारे विभागों से मंजूरी लेनी पड़ती है. लेकिन हमारी सरकार बनने के बाद तीन साल के लिए हिन्दुस्तान के युवाओं को बिजनेस खोलने के लिए किसी तरह की कोई मंजूरी नहीं लेनी होगी.
- पीएम मोदी ने मनरेगा को बेकार स्कीम बताया. आज पूरा देश जानता है कि मनरेगा ने देश की कितनी मदद की. अब हम इसके तहत 100 से 150 दिन गारंटी रोजगार कर देंगे.
- मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब और कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने दो दिनों में किसानों का लोन माफ कर दिया. किसानों के लिए हमने दो बड़ी चीजें सोची हैं. पहला किसानों के लिए अलग से बजट होगा. हिन्दुस्तान के किसान को मालूम होना चाहिए कि उसे कितना पैसा दिया जा रहा है और उसकी फसल की एमएसपी कितनी तय की जा रही है.
- दूसरी करोड़पति बैंक लोन लेते हैं और बैंक का पैसा लेकर भाग जाते हैं. जो किसान बैंक लोन लेते हैं वो अगर पैसा नहीं दे पाते हैं तो उन्हें जेल में डाल दिया जाता है. हमने तय किया है कि ऐसे मामलों को आपराधिक मामला ना माना जाए. किसान अगर कर्ज नहीं चुका पा रहा है तो इससे सिविल अपराध माना जाए.
- शिक्षा सेक्टर के लिए हमने तय किया है कि जीडीपी का छह फीसदी पैसा हिन्दुस्तान की शिक्षा के लिए दिया जाएगा. स्कूल, यूनिवर्सिटी, कॉलेज, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान सब जगह बनने चाहिए. मोदी सरकार ने उसे कम कर दिया है.
- स्वास्थ्य के लिए सरकार एक स्कीम लेकर आई है. इसका मकसद हिन्दुस्तान की जनता का पैसा लेकर देश के चुनिंदा बिजनसमैन के जेब में पैसा डालना है. हम सरकारी अस्पताल और सरकारी पब्लिक हेल्थ को मजबूत करेंगे. हमारा फोकस होगा कि गरीब आदमी को अच्छे से अच्छे अस्पताल में अच्छा ईलाज मिले.
- राष्ट्रीय सुरक्षा की बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पिछले पांच साल में भाजपा ने देश को बांटने का काम किया है. उसने देश में नफरत फैलाई है. आतंकवाद बढ़ा है. कांग्रेस देश को जोड़ने और एक साथ ले जाने का काम करेगी, हमारा नेशनल और इंटरनल सिक्यूरिटी पर ज्यादा फोकस होगा.
बुधवार, 3 अक्टूबर 2018
अब भारत नहीं कहलाएगा किसानों का देश
कृषि प्रधान भारत देश में लगता है यहाँ खेती तो की जाएगी, लेकिन किसानों के द्वारा नहीं, खेती करने वाले विशालकाय कॉर्पोरेट्स होंगे। आज के अन्नदाता किसानों की हैसियत उन बंधुआ मजदूरों या गुलामों की होगी, जो अपनी भूख के लिये कॉर्पोरेट्स के आदेश पर अपनी ही जमीनों पर चाकरी करेंगे।
इस समय देश में खेती और किसानों के लिये जो नीतियाँ और योजनाएँ लागू की जा रही हैं उसके पीछे यही सोच दिखाई देती है। कॉर्पोरेट हितों ने पहले तो षड्यंत्रपूर्वक देश की ग्रामीण उद्योग व्यवस्था तोड़ दी और गाँवों के सारे उद्योग धन्धे बन्द कर दिये। स्थानीय उत्पादकों को ग्राहकों के विरुद्ध खड़ा किया गया। विज्ञापनों के जरिए स्थानीय उद्योगों में बनी वस्तुओं को घटिया व महंगा और कम्पनी उत्पादन को सस्ता व गुणवत्तापूर्ण बताकर प्रचारित किया गया और यहाँ की दुकानों को कम्पनी के उत्पादनों से भर दिया गया।इस गोरखधंधे में स्थानीय व्यापारियों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने अपने व्यापार और देशी उद्योगों के पैरों पर खुद कुल्हाड़ी मारकर उसे कॉर्पोरेट के हवाले कर दिया। अब उद्योग, व्यापार और खेती पर कॉर्पोरेट्स एक-के-बाद-एक कब्जा करते जा रहे हैं।
प्राकृतिक संसाधन, उद्योग और व्यापार पर तो उन्होंने पहले ही कब्जा कर लिया था। अब वे खेती पर कब्जा जमाना चाहते हैं ताकि कॉर्पोरेट उद्योगों के लिये कच्चा माल और दुनिया में व्यापार के लिये जरूरी उत्पादन कर सकें। कॉर्पोरेट खेती के हित में छोटे किसानों के पास पूँजी की कमी, छोटी जोतों में खेती का अ-लाभप्रद होना, यांत्रिक और तकनीकी खेती कर पाने में अक्षमता आदि के तर्क गढ़े गए। कहा गया कि पारिवारिक खेती करने वाले किसान उत्पादन बढ़ाने में सक्षम नहीं हैं। इस तर्क की आड़ में ककॉर्पोरेट्स ने प्रत्यक्ष स्वामित्व या पट्टा या लम्बी लीज पर जमीन लेकर खेती करने या किसान समूह से अनुबन्ध करके किसानों को बीज, कर्ज, उर्वरक, मशीनरी और तकनीक आदि उपलब्ध कराकर खेती करने का जुगाड़ कर लिया। खेती की जमीन, कृषि उत्पादन, कृषि उत्पादों की खरीद, भण्डारण, प्रसंस्करण, विपणन, आयात-निर्यात आदि सभी पर कॉर्पोरेट्स अपना नियंत्रण करना चाहते हैं। दुनिया के विशिष्ट वर्ग की भौतिक जरूरतों को पूरा करने के लिये जैव ईंधन, फलों, फूलों या खाद्यान्न की खेती भी वैश्विक बाजार को ध्यान में रखकर करना चाहते हैं। वे फसलें, जिनसे उन्हें अधिकतम लाभ मिलेगा, पैदा की जाएँगी और अपनी शर्तोंं व कीमतों पर बेची जाएँगी।
अनुबन्ध खेती और कॉर्पोरेट खेती के अनुरूप नीतिगत सुधार के लिये उत्पादन प्रणालियों को पुनर्गठित करने और सुविधाएँ देने के लिये नीतियाँ और कानून बनाए जा रहे हैं। दूसरी हरित क्रान्ति के द्वारा कृषि में आधुनिक तकनीक, पूँजी-निवेश, कृषि यंत्रीकरण, जैव तकनीक और जीएम फसलों, ई-नाम आदि के माध्यम से अनुबन्ध खेती, कॉर्पोरेट खेती के लिये सरकार एक व्यवस्था बना रही है।
डब्ल्यूटीओ का समझौता, कॉर्पोरेट खेती के प्रायोगिक प्रकल्प, अनुबन्ध खेती कानून, कृषि और फसल बीमा योजना में विदेशी निवेश, किसानों के संरक्षक सीलिंग कानून को हटाने का प्रयास, आधुनिक खेती के लिये इजराइल से समझौता, खेती का यांत्रिकीकरण, जैव तकनीक व जीएम फसलों को प्रवेश, कृषि मंडियों का वैश्विक विस्तारीकरण, कर्ज राशि में बढ़ोत्तरी, कर्ज ना चुका पाने में अक्षमता पर खेती की गैरकानूनी जब्ती, कृषि उत्पादों की बिक्री की शृंखला, सुपरबाजार, जैविक ईंधन, जेट्रोफा, इथेनॉल के लिये गन्ना और फलों, फूलों की खेती आदि को बढ़ावा देने की सिफारिशें, निर्यातोन्मुखी कॉर्पोरेट खेती और विश्व व्यापार संगठन के कृषि समझौते के तहत वैश्विक बाजार में खाद्यान्न की आपूर्ति की बाध्यता आदि सभी को एकसाथ जोड़कर देखने से कॉर्पोरेट खेती की तस्वीर स्पष्ट होती है।
खेती को उद्योग में तब्दील करने की बातें कई सालों से होती रही हैं, लेकिन अब कॉर्पोरेट हितों के चलते इसे अमलीजामा पहनाने की तैयारियाँ जोर-शोर से दिखाई देने लगी हैं। राज्यों और केन्द्र की सरकारों समेत ‘विश्व व्यापार संगठन’ सरीखे देशी-विदेशी संस्थान अव्वल तो किसानी को किसानों के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं और दूसरे सीमित होती कृषि भूमि में बाजारों के लिये भरपूर उत्पादन के मार्फत मुनाफा कूटना चाहती हैं। ऐसे में किसानी अब किसानों की बजाय कॉर्पोरेट का धंधा बनती जा रही है।इस समय देशी-विदेशी बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ रॉथशिल्ड, रिलायंस, पेप्सी, कारगिल, ग्लोबल ग्रीन, रॅलीज, आयटीसी, गोदरेज, मेरी को आदि के द्वारा पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तामिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़ आदि प्रदेशों में आम, काजू, चीकू, सेब, लीची, आलू, टमाटर, मशरुम, मक्का आदि की खेती की जा रही है। उच्च शिक्षित युवा जो आधुनिक खेती करने, छोटी दुकानों में सब्जी बेचने, प्रसंस्करण करने आदि के काम कर रहे हैं, उनमें से अधिकांश कॉर्पोरेटी व्यवस्था स्थापित करने के प्रायोगिक प्रकल्पों पर काम कर रहे हैं।
भारत में किसी भी व्यक्ति या कम्पनी को एक सीमा से अधिक खेती खरीदने, रखने के लिये सीलिंग कानून प्रतिबन्धित करता है। इसके चलते कॉर्पोरेट घरानों को खेती पर सीधा कब्जा करना सम्भव नहीं है। इसलिये सीलिंग कानून बदलने के प्रयास किये जा रहे हैं। कुछ राज्यों में अनुसन्धान और विकास, निर्यातोन्मुखी खेती के लिये कृषि व्यवसाय फर्मों को खेती खरीदने की अनुमति दी गई है, कहीं पर कम्पनियों के निदेशकों या कर्मचारियों के नाम पर खेती खरीदी की गई है, तो कहीं राज्य सरकारों ने नाम मात्र राशि लेकर पट्टे पर जमीन दी है।
बंजर भूमि खरीदने या किराये पर लेने की अनुमति दी जा रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार आज देश में लगभग 40 प्रतिशत किसान अपनी खेती बेचने के लिये तैयार बैठे है। केन्द्रीय वित्त मंत्री ने संसद में कहा था कि सरकार किसानों की संख्या 20 प्रतिशत तक ही सीमित करना चाहती है। अर्थात् यह 20 प्रतिशत किसान वही होंगे, जो देश के गरीब किसानों से खेती खरीद सकेंगे और जो पूँजी, आधुनिक तकनीक और यांत्रिक खेती का इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे। यह सम्भावना उन किसानों के लिये नहीं है जो खेती में लुटने के कारण परिवार का पेट नहीं भर पा रहा है। इसका अर्थ यह है कि आज के शत-प्रतिशत किसानों की खेती पूँजीपतियों के पास हस्तान्तरित होगी और वे किसान कॉर्पोरेट होंगे।
किसानों की संख्या 20 प्रतिशत करने के लिये ऐसी परिस्थितियाँ पैदा की जा रही हैं कि किसान स्वेच्छा से या मजबूर होकर खेती छोड़ दे या फिर ऐसे तरीके अपनाए जिसके द्वारा किसानों को झाँसा देकर फँसाया जा सके। किसान को मेहनत का मूल्य न देकर सरकार खेती को घाटे का सौदा इसीलिये बनाए रखना चाहती है ताकि कर्ज का बोझ बढ़ाकर उसे खेती छोडऩे के लिये मजबूर किया जा सके। जो किसान खेती नहीं छोड़ेंगे उनके लिये अनुबन्ध खेती के द्वारा कॉर्पोरेट खेती के लिये रास्ता बनाया जा रहा है। देश में बाँधों, उद्योगों और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिये पहले ही करोड़ों हेक्टर जमीन किसानों के हाथ से निकल चुकी है। अब बची हुई जमीन धीरे-धीरे उन कॉर्पोरेट्स के पास चली जाएगी जो दुनिया में खेती पर कब्जा करने के अभियान पर निकले हैं। लूट की व्यवस्था को कानूनी जामा पहनाकर उसे स्थायी और अधिकृत बनाना कॉर्पोरेट की नीति रही है। भारत में जब अंग्रेजी राज स्थापित हुआ था तब जमींदारी कानून के द्वारा लूट की व्यवस्था बनाई गई थी। लगान लगाकर किसानों को लूटा गया था। अनुबन्ध खेती, कारपोरेट खेती जमींदारी का नया प्रारूप है। अब केवल लगान नहीं, खेती के हर स्तर पर लूट की व्यवस्था बनाकर खेती ही लूटी जा रही है। देश खाद्यान्न सुरक्षा, आत्मनिर्भरता को हमेशा के लिये खो रहा है। यह परावलम्बन राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये भी बड़ा खतरा है। भारत फिर से गुलामी की जंजीरों में बँधता जा रहा है विवेकानंद माथने
शनिवार, 22 सितंबर 2018
नहीं चलेगी चुनाव डयूटि से बचने की बहाने बाजी
- फर्जी और झूठे प्रार्थना पत्रों की होगी जांच
- गलत पाये जाने पर जायेगी नौकरी
सीहोर। विधानसभा निर्वाचन 2018 हेतु निर्वाचन कार्यालय द्वारा सभी विभागों से कर्मचारियों की जानकारी मांगी जाकर कर्मचारियों को मतदान दल सहित अन्य चुनावी कार्यो में लगाया जा रहा हैा
प्राय- देखा जाता है कि जैसे ही चुनाव आते हैं कई चालाक कर्मचारी कई कई प्रकार के बहाने बनाकर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर चुनाव कार्य से मुक्त होना चाहते है या प्रयास करते हैा
इस संबंध में अपर कलेक्टर सीहोर श्री व्ही के चतुर्वेदी एवं श्री मेहताब सिंह उप जिना निर्वाचन अधिकारी सीहोर ने प्रेस् विज्ञप्ति जारी कर चेतावनी देते हुये कहा है कि यदि किसी कर्मचारी द्वारा चुनाव की डयूटि से बचने का बहाना या फर्जी दस्तावेजों का सहारा लेकर चुनाव से मुक्त किये जाने का प्रयास अथवा छदम प्रयास किया गया तो ऐसे कर्मचारी को उसकी नौकरी से हाथ धोना पड सकता हैा
ध्यान रहे कि जैसे ही कर्मचारी की डयूटि चुनाव कार्य से लगाई जाती है तो बडी संख्या में कुछ कर्मचारी चुनाव से बचने का झूठा प्रयास करते है और अनावश्यक रूप से चुनाव कार्य से मुक्त हेतु आवेदन कार्यालय में प्रस्तुत करते है जिससे निर्वाचन कार्यालय को उनके आवेदन की जांच में काफी समय लग जाता है एवं निर्वाचन कार्य बाधित होता है
इस स्थिति को द़ष्टिगत रखते हुये उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने कहा है कि विभिन्न कारणों से चुनाव कार्य से मुक्ति हेतु प्राप्त आवेदनों का पूर्ण गंभीरता से जांच में लिया जायेगा और प्राप्त आवेदन की जांच की जायेगी गंभीर श्रेणी के बीमार एवं दिव्यागं कर्मचारियों महिला पुरूष कर्मचारियों का मेडिकल बोर्ड से परीक्षण प्रत्यक्ष में कराया जायेगा यदि गठित मेडिकल बोर्ड द्वारा अथवा जिला निर्वाचन पदाधिकारी की टीम द्वारा जांच उपरांत आवेदन कार्यवाही योग्य नहीं पाया गया तो ऐसे कर्मचारी के विरूद निर्वाचन लोक प्रतिनिधित्व एवं पराक्रम अधिनियम के प्रावधानों के अन्तर्गत कडी दण्डात्मक कार्यवाही की जावेगी-- यदि किसी कर्मचारी का चुनाव कार्य से मुक्ती का आवेदन असत्य अथ्वा झूठा पाया गया तो उसकी नौकरी भी जा सकती हैा
सोमवार से फिर बढ़ जाएंगे वाहनों के बीमा की राशि
सीहोर। मोदी सरकार द्वारा देश की जनता के लिए शुरू किए गए अच्छे दिनों में जहां पेट्रोल और डीजल के दाम लगातार बढ़ाए जा रहे हैं। वहीं अब वाहनों के बीमा की राशि में भी एक हजार रूपए तक की बढ़ौतरी की जा रही है जबकि कुछ दिन पहले ही एक साल की बीमा अवधि को बढ़ाकर तीन और पंाच साल कर दिया गया था इसके बाद अब बीमा राशि में बढ़ोतरी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार बीमा कंपनियों द्वारा वाहनों के बीमा के साथ वाहन चालक और वाहन मालिक का भी दुर्घटना बीमा किया जाता है। पूर्व में इसके लिए 50 रूपए की प्रीमियम ली जाती थी और एक लाख रूपए का बीमा कवर किया जाता था। अब इसे बढ़ाकर 750 रूपए कर दिया गया है और 15 लाख रूपए का बीमा कवर कर दिया गया है। यह दो पहिया, चार पहिया और अन्य सभी वाहनों पर फस्र्ट पार्टी और थर्ड पार्टी बीमा पर लागू किया गया है। इसके अलावा जीएसटी अलग से वसूला जाएगा। इस वृद्धि के बाद वाहन मालिकों की जेब पर एक हजार रूपए की चपत लगेगी। इसी प्रकार नए वाहन खरीदने पर आपको पांच साल की बीमा की राशि एक मुश्त ही भुगतान करना पड़ेगा। इसी प्रकार चार पहिया वाहनों का बीमा कराना आवश्यक है। इस तरह वाहन खरीदने वालोें की जेब पर भार पड़ रहा है। दूसरी ओर लगातार डीजल और पेट्रोल के दाम भी बढ़ रहे हैं।
इनका कहना है
वाहनों के बीमा के साथ ही चालक और वाहन मालिक की बीमा प्रीमियम 750 रूपए किया गया है और बीमा कवर 15 लाख कर दिया गया है। यह बढ़ोत्तरी सोमवार से लागू होगी।
- सुरेश कुमार आहूजा प्रबंधक
ओरिएंटल इंश्योरेन्स कंपनी लिमिटेड
पुलिस कानून के मुताबिक़ काम करेगी या मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश पर..?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा SC/ST एक्ट को लेकर दिए फैसले को संसद ने बदल दिया है। यानि इस एक्ट में दर्ज प्रकरणों में बिना विवेचना ही गिरफ़्तारी होगी। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चौहान ने कहा कि इस एक्ट में बिना विवेचना गिरफ़्तारी नहीं होगी। अब सवाल यह उठता है कि पुलिस कानून के मुताबिक़ काम करेगी या मुख्यमंत्री के मौखिक आदेश पर..?
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