शुक्रवार, 16 फ़रवरी 2018

कवि कुमार विश्वास एक बार फिर सुर्खियों में


 आए दिन किसी न किसी वजह से चर्चा में रहने वाले कवि कुमार विश्वास एक बार फिर सुर्खियों में है। इसकी वजह इस बार कोई विवाद नहीं है बल्कि उनकी बाइक चलाती एक फोटो है। 
फोटो में कुमार विश्वास गाड़ी चलाते नजर आ रहे हैं। बाइक के पीछे उनकी वाइफ मंजू शर्मा भी बैठी हुई हैं। उनकी ये फोटो वैलेंटाइन डे के दिन सामने आई है। दरअसल, कुमार विश्वास ने 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे पत्नी संग बाइक पर राइडिंग कर सेलिब्रेट किया।
 बता दें, कुमार की वाइफ कॉलेज में प्रोफेसर हैं वहीं दोनों की लव मैरिज हुई थी। उनकी इस फोटो को हिमांशी सिंह के नाम की महिला ने अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर की है। हिमांशी ने कुमार विश्वास की बाइक राइडिंग की फोटों पर हैलमेट पहनने को लेकर ट्विटर अपत्ति दर्ज की। इसके बाद कुमार ने ट्विट करते हुए लिखा कि,"क्षमा बालिके, घर के सामने की गली में अपने पार्क के चारों और टहला था। बस हमका माफी दै दो।"

सोमवार, 5 फ़रवरी 2018

*लोगों का आंकलन नहीं मदद करो*

महाभारत के युद्ध में अर्जुन और कर्ण के बीच घमासान चल रहा था। अर्जुन का तीर लगने पे कर्ण का रथ 25-30 हाथ पीछे खिसक जाता , और कर्ण के तीर से अर्जुन का रथ सिर्फ 2-3 हाथ। लेकिन श्री कृष्ण थे की कर्ण के वार की तारीफ़ किये जाते, अर्जुन की तारीफ़ में कुछ ना कहते। अर्जुन बड़ा व्यथित हुआ, पूछा, हे पार्थ आप मेरी शक्तिशाली प्रहारों की बजाय उसके कमजोर प्रहारों की तारीफ़ कर रहे हैं, ऐसा क्या कौशल है उसमे। श्री कृष्ण मुस्कुराये और बोले, तुम्हारे रथ की रक्षा के लिए ध्वज पे हनुमान जी, पहियों पे शेषनाग और सारथि रूप में खुद नारायण हैं । उसके बावजूद उसके प्रहार से अगर ये रथ एक हाथ भी खिसकता है तो उसके पराक्रम की तारीफ़ तो बनती है । कहते हैं युद्ध समाप्त होने के बाद श्री कृष्ण ने अर्जुन को पहले उतरने को कहा और बाद में स्वयं उतरे। जैसे ही श्री कृष्ण रथ से उतरे , रथ स्वतः ही भस्म हो गया । वो तो कर्ण के प्रहार से कबका भस्म हो चूका था, पर नारायण बिराजे थे इसलिए चलता रहा । ये देख अर्जुन का सारा घमंड चूर चूर हो गया । कभी जीवन में सफलता मिले तो घमंड मत करना, कर्म तुम्हारे हैं पर आशीष ऊपर वाले का है। और किसी को परिस्थितिवष कमजोर मत आंकना,हो सकता है उसके बुरे समय में भी वो जो कर रहा हो वो आपकी क्षमता के भी बाहर हो। - संकलित

शनिवार, 17 सितंबर 2011

सच ही कहा था प्रभात झा ने


विनीत दुबे, सीहोर। करीब चार माह पहले जब पेट्रोलिय पदार्थों की कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई थी तब भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रभात जी झा ने राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती प्रतिभा देवी पाटिल को इच्छा मृत्यू के लिए पत्र लिखा था। श्री झा के इस कदम को जहां मीडिया ने महज एक प्रचार स्टंट बताया था। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी के लोगों ने भी श्री झा के इस पत्र को लेकर मुस्कान भर दिखाई थी। लेकिन श्री झा ने इच्छा मृत्यू के लिए पत्र लिखकर आम आदमी की दशा को उजागर किया था।
एक बार फिर केंद्र सरकार ने पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि कर दी है। अब बारी बैंकों के कर्ज और रसोई गैस में बढ़ोत्तरी की है। हो सकता है कुछ दिन बाद डीजल व केरोसीन के दामों में वृद्धि हो जाए। लगातार बढ़ रही महंगाई से आम आदमी का जीना दूभर हो गया है। सब्जी से लेकर दूध और मकान से लेकर इलाज सभी महंगा हो रहा है। ऐसे में दिहाड़ी मजदूर और कम वेतन पर काम करने वालों के सामने और क्या चारा बच सकता है। यदि समय रहते महंगाई डायन को काबू में नहीं किया गया तो देश में हजारों लोग महामहिम राष्ट्रपति से अनुमति मांगे बगैर ही इच्छा मृत्यू को प्राप्त हो जाएंगे।

शनिवार, 3 सितंबर 2011

टीम मनमोहन में करोड़पतियों की भरमार


नई दिल्ली।। भ्रष्टाचार को लेकर घिरी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के मंत्रियों में करोड़पतियों की भरमार है। पीएमओ की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए गए चल - अचल संपत्ति के आंकड़े के मुताबिक , कपिल सिब्बल , प्रफुल्ल पटेल और एम . के . अलागिरी सबसे रईस हैं , वहीं रक्षा मंत्री ए . के . एंटनी के पास सबसे कम संपत्ति है। हालांकि , चौंकाने वाली बात यह है कि सभी मंत्रियों को 31 अगस्त तक यह ब्योरा पीएमओ को उपलब्ध कराने के निर्देश के बावजूद वी . किशोर चंद्र देव , विलास राव देशमुख , जयंती नटराजन , जितेंद्र सिंह , नमो नारायण मीणा और कृष्णा तीरथ समेत करीब 10 मंत्रियों ने अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पास गाड़ी के नाम पर सिर्फ 1996 मॉडल की एक मारुति 800 कार है। वहीं , उनके मंत्रिमंडल के कई सदस्यों के पास एक से ज्यादा लग्जरी गाडि़यां हैं। प्रधानमंत्री के नाम खेती योग्य कोई जमीन नहीं है , जबकि उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों के पास कई हजार एकड़ कृषिभूमि है। जन लोकपाल विधेयक को लेकर हुए हालिया आंदोलन के दौरान टीम अन्ना के निशाने पर रहे सिब्बल के देश के कई शहरों में फ्लैट और दो राज्यों में खेती योग्य जमीन है।

प्रधानमंत्री के पास चंडीगढ़ में 4498.5 वर्गफुट क्षेत्रफल का एक फ्लैट है। उनके पास इसी शहर में 2907 वर्गफुट का एक और घर है जो 1987 में उन्होंने 8,62000 रुपये में खरीदा था। दोनों की कुल मौजूदा कीमत 90 लाख है। पीएम का एक फ्लैट वसंत कुंज में भी है , जिसकी मौजूदा कीमत 88.67 लाख बताई गई है। उनके पास 15 हजार रुपये ही नकद में हैं। बैंकों में उनकी जमापूंजी का ब्योरा देखें , तो सेंट्रल एसबीआई सेक्रेटेरिएट शाखा में 11,39,889 और 6,46,293 रुपये , एसबीआई संसद भवन शाखा में आठ लाख से ज्यादा की राशि जमा है।

पत्नी गुरशरण कौर के स्टेट बैंक ऑफ पटियाला में खाते में 11 लाख से अधिक राशि जमा है। एसबीआई में पीएम की एफडी करीब 50 लाख रुपये की है। एसबीआई की सेंट्रल सेक्रेटेरियट शाखा में टर्म डिपॉजिट 30 लाख , नब्बे लाख और अस्सी लाख के हैं। इसी तरह 7 लाख से ज्यादा के पोस्ट ऑफिस में एनएसएस भी मनमोहन ने ले रखे हैं। पीएम की पत्नी के पास 2.75 लाख के सोने के आभूषण हैं। पीएम के पास दूसरे मंत्रियों की तरह कोई कृषि या दूसरी जमीन नहीं है।

सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपनी कुल अचल संपत्ति 62,58279 रुपये की और चल संपत्ति 63,06327 होने की जानकारी दी है। कुल मिलाकर उनकी संपत्ति 1,25,64,606 रुपये की है। प्रणब ने अपने पास फोर्ड आइकॉन कार होने की जानकारी भी दी है। मुनीरका में उनके पास एक फ्लैट है , जिसकी कीमत 39.20 लाख है। प्रणब दा के पास कोलकाता में भी 21.12 लाख का एक फ्लैट है। पैतृक कृषि जमीन और मकान में उनका अच्छा खासा हिस्सा है।

रक्षा मंत्री ए . के . एंटनी संपत्ति - जमापूंजी के मामले में सबसे नीचे नजर आ रहे हैं। उनके पास न तो कोई घर है और न कार। कामकाजी पत्नी के पास एक कार जरूर है , वह भी सेकंड हैंड मारुति वैगनआर। इसे भी उन्होंने 1.30 लाख के लोन से खरीदा है। पत्नी के पास 15 लाख का एक घर केरल में है और इतनी की कीमत का एक प्लॉट उनके पास है।

गृहमंत्री पी . चिंदबरम की अचल और चल संपत्ति की कुल कीमत 11.16 करोड़ रुपये है। कृषि मंत्री शरद पवार की कुल अचल संपत्ति 3.46 करोड़ की है तो उनकी पत्नी की अचल संपत्ति की कुल कीमत 96.97 लाख है। हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली के नाम पर 1.65 करोड़ रुपये पवार परिवार के पास हैं। हैरानी की बात यह है कि पवार ने अपने पास कार नहीं होने की जानकारी दी है। विदेश मंत्री एसएम कृष्णा के पास कुल पूंजी करीब 17.59 करोड़ जबकि अचल संपत्ति 32 लाख के करीब है।

कपिल सिब्बल के पास करीब 35 करोड़ की चल - अचल संपत्ति है। उनके पास बेंगलुरु , दिल्ली , फरीदाबाद और गुड़गांव में जमीन है। इसके अलावा सिकंदराबाद , पटना , दिल्ली और गुड़गांव में घर हैं। इसके अलावा नकदी करीब 3.11 लाख और वित्तीय संस्थान और गैर वित्तीय कंपनियों में जमा - करीब 76.91 लाख रुपये जमा हैं। उनके पास 5 गाड़ियां - टोयोटा कोरोला , ह्युंदै सोनाटा , सुजुकी जीप , एनफील्ड मोटरसाइकिल , रेवा इलेक्ट्रिक कार हैं।

प्रफुल्ल पटेल के पास खुद की करीब 33 करोड़ 94 लाख की और बच्चों के नाम 54 करोड़ 72 लाख की अचल संपत्ति है। इसके अलावा उनके पास करीब 4 करोड़ 33 लाख की चल संपत्ति भी है।

मंगलवार, 19 जुलाई 2011

10 reason why i join journalism


10 reason why i join journalism
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01- I Hate To sleeping
02- I can Not live Without Tension
03- I Have Enjoyed My Life In Childhood
04- I Want Disturb My Family Life
05- I Believe In Geeta "Kam kiye Jao Fal KI Iccha Mat Karo
06- I Do not Want To Spend time With Family
07- I Want To Take Revenge From Myself
07- I Desperately Need Break Up From My Dearest And Nearest
08- I Want Social Boycott
09- I Love To Work On Holiday's
10- I Want To spend My Life With Money Crises

रविवार, 17 जुलाई 2011

ॐ मृत्युंजयाय रुद्राय नीलकण्ठाय शम्भवे । अमृतेशाय शर्वाय महादेवाय ते नम: ॐ॥


श्रावण मासमें आशुतोष भगवान्‌ शंकरकी पूजाका विशेष महत्व है। जो प्रतिदिन पूजन न कर सकें उन्हें सोमवारको शिवपूजा अवश्य करनी चाहिये और व्रत रखना चाहिये। सोमवार भगवान्‌ शंकरका प्रिय दिन है, अत: सोमवारको शिवाराधन करना चाहिये।श्रावणमें पार्थिव शिवपूजाका विशेष महत्व है। अत: प्रतिदिन अथवा प्रति सोमवार तथा प्रदोषको शिवपूजा या पार्थिव शिवपूजा अवश्य करनी चाहिये।

सोमवार के व्रत के दिन प्रातःकाल ही स्नान ध्यान के उपरांत मंदिर देवालय या घर पर श्री गणेश जी की पूजा के साथ शिव-पार्वती और नंदी की पूजा की जाती है। इस दिन प्रसाद के रूप में जल , दूध , दही, शहद , घी, चीनी, जने‌ऊ, चंदन, रोली, बेल पत्र, भांग, धतूरा, धूप, दीप और दक्षिणा के साथ ही नंदी के लि‌ए चारा या आटे की पिन्नी बनाकर भगवान पशुपतिनाथ का पूजन किया जाता है। रात्रिकाल में घी और कपूर सहित गुगल, धूप की आरती करके शिव महिमा का गुणगान किया जाता है। लगभग श्रावण मास के सभी सोमवारों को यही प्रक्रिया अपना‌ई जाती है। इस मास में लघुरुद्र, महारुद्र अथवा अतिरुद्र पाठ करानेका भी विधान है।

इस मास के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर शिवामूठ च़ढ़ा‌ई जाती है। वह क्रमशः इस प्रकार है :

प्रथम सोमवार को- कच्चे चावल एक मुट्ठी, दूसरे सोमवार को- सफेद तिल्ली एक मुट्ठी, तीसरे सोमवार को- ख़ड़े मूँग एक मुट्ठी, चौथे सोमवार को- जौ एक मुट्ठी और यदि पाँचवाँ सोमवार आ‌ए तो एक मुट्ठी सत्तू च़ढ़ाया जाता है।

शिव की पूजा में बिल्वपत्र अधिक महत्व रखता है। शिव द्वारा विषपान करने के कारण शिव के मस्तक पर जल की धारा से जलाभिषेक शिव भक्तों द्वारा किया जाता है। शिव भोलेनाथ ने गंगा को शिरोधार्य किया है।

एक कथा के अनुसार श्रीविष्णु पत्नी लक्ष्मी ने शंकर के प्रिय श्रावण माह में शिवलिंग पर प्रतिदिन 1001 सफेद कमल अर्पण करने का निश्चय किया। स्वर्ण तश्तरी में उन्होंने गिनती के कमल रखे, लेकिन मंदिर पहुँचने पर तीन कमल अपने आप कम हो जाते थे। सो मंदिर पहुँचकर उन्होंने उन कमलों पर जल छींटा, तब उसमें से एक पौधे का निर्माण हु‌आ। इस पर त्रिदल ऐसे हजारों पत्ते थे, जिन्हें तोड़कर लक्ष्मी शिवलिंग पर चढ़ाने लगीं, सो त्रिदल के कम होने का तो सवाल ही खत्म हो गया। और लक्ष्मी ने भक्ति के सामर्थ्य पर निर्माण कि‌ए बिल्वपत्र शिव को प्रिय हो ग‌ए। लक्ष्मी यानी धन-वैभव, जो कभी बासी नहीं होता। यही वजह है कि लक्ष्मी द्वारा पैदा किया गया बिल्वपत्र भी वैसा ही है। ताजा बिल्वपत्र न मिलने की दशा में शिव को अर्पित बिल्वपत्र पुनः चढ़ाया जा सकता है। बिल्वपत्र का वृक्ष प्रकृति का मनुष्य को दिया वरदान है।

सुहागन स्त्रियों को इस दिन व्रत रखने से अखंड सौभाग्य प्राप्त होता है। विद्यार्थियों को सोमवार का व्रत रखने से और शिव मंदिर में जलाभिषेक करने से विद्या और बुद्धि की प्राप्ति होती है। बेरोजगार और अकर्मण्य जातकों को रोजगार तथा काम मिलने से मानप्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। सदगृहस्थ नौकरी पेशा या व्यापारी को श्रावण के सोमवार व्रत करने से धन धान्य और लक्ष्मी की वृद्धि होती है। ं भगवान श्री कृष्‍ण के वृन्‍दावन में भी सावन के महीने में बहारें छायीं रहेंगीं, जहॉं झूलों और रास लीला‌ओं का परम्‍परागत उत्‍सव रहेगा वहीं कृष्‍ण साधना और कृष्‍ण पूजा भी इन दिनों भारी संख्‍या में होगी पूरे महीने जहॉं शिव और कृष्‍ण की पूजा और साधना परम्‍परा चलेगी वहीं शिवालय और कृष्‍ण मन्दिर इन दिनों लोगों के मेलों से घिरे रहेंगे ।

आज भी उत्तर भारत में कांवड़ परम्परा का बोलबाला है। श्रद्धालु गंगाजल लाने के लि‌ए हरिद्वार , गढ़ गंगा और प्रयाग जैसे तीर्थो में जाकर जलाभिषेक करने हेतु कांवड़ लेकर आते हैं। यह सब साधन शिवजी की कृपा प्राप्त करने के लि‌ए है।

शुक्रवार, 15 जुलाई 2011

पत्रकारिता की क़ीमत जान हो सकती है


पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है, जिसकी क़ीमत क्या है, अभी यह तय नहीं हुआ है. पत्रकारिता में जो लोग आते हैं उन्हें कम से कम यह ध्यान में रखकर आना चाहिए कि पत्रकारिता के पेशे की क़ीमत उनकी अपनी जान हो सकती है. मुंबई में मिड डे के पत्रकार जेडे की हत्या इस सत्य को एक बार फिर रेखांकित कर रही है. जेडे निर्भीकता से अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह कर रहे थे. बुनियादी तौर पर वह क्राइम रिपोर्टर थे और मुंबई के अंडरवर्ल्ड और मुंबई पुलिस के गठजोड़ तथा कौन स़फेदपोश ऐसे हैं, जो अपराध को प्रश्रय देते हैं, इसके बारे में वह लगातार लिखते रहते थे. उनके पास जानकारियां भी थीं और ज़्यादातर जानकारियां उनके पास अपने आप पहुंच रही थीं. पत्रकारिता में एक ऐसी स्थिति आती है जब आप खुद को स्थापित कर लेते हैं तो सारी खबरें अपने आप चलकर आ जाती हैं. जेडे इसी श्रेणी के पत्रकार थे. जेडे को श्रद्धांजलि देने के साथ हम पत्रकारिता के अपने अनुभव के बारे में बात करना चाहेंगे. हमारे बीच में ऐसे पत्रकारों की भरमार है, जो पत्रकारिता के बुनियादी पेशे की ज़िम्मेदारी का निर्वाह करने के बजाय पीआर जर्नलिज़्म यानी पब्लिक रिलेशन जर्नलिज़्म करने में ज़्यादा रुचि दिखाते हैं.

बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो प्रेस कटिंग के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करते हैं. ऐसे बहुत कम लोग बचे हैं, जो फील्ड में जाते हैं और तथ्यों की जांच पड़ताल करते हैं और सत्य के साथ खड़े होते हैं. जेडे सत्य के साथ खड़े होने वाले पत्रकारों में से एक थे. इसलिए जेडे की शहादत हमें कई सीख देती है. पहली सीख यह देती है कि अगर सही पत्रकारिता करने वाले लोग एकजुट नहीं हुए तो अपराध, ख़ासकर स़फेदपोश लोगों के साए में चलने वाला अपराध उन्हें अभी और परेशान करेगा. जेडे की मौत यह भी सीख देती है कि सही पत्रकारिता करने वाले लोग अगर आसान ज़िंदगी जीना चाहेंगे तो यह उनके लिए संभव नहीं होगा. अगर हम इतिहास में देखें तो पहला नाम याद आता है गणेशशंकर विद्यार्थी का, जिनकी हत्या कानपुर में सत्य लिखने की वजह से हुई थी.

हिंदुस्तान में बहुत सारे पत्रकार स़िर्फ इसलिए मार दिए गए, क्योंकि उन्होंने अपने क़स्बे में चीनी की चोरबाज़ारी के बारे में रिपोर्टें लिखी थीं. बांदा में रामकृष्ण गुप्ता ऐसे पत्रकार थे, जिनकी इसी वजह से हत्या हुई, क्योंकि वह स्थानीय कालाबाज़ारियों के ख़िला़फ रिपोर्ट लिखते थे. वह दैनिक अख़बार के पत्रकार थे. फेहरिस्त लंबी है, हर प्रदेश में, हर ज़िले में भ्रष्टाचार और अपराध में लिप्त ऐसे संगठित गिरोह मिल जाएंगे, जिन्होंने सच लिखने वाले पत्रकारों पर हमले कराए.

आज भी हिंदुस्तान में हर जगह ईमानदारी से पत्रकारिता का धर्म निभाने वाले लोग हैं, लेकिन उन सब पर अपनी-अपनी तरह के खतरे मंडरा रहे हैं. कहीं किसी ज़िले में ठेकेदार, नेता और प्रशासन का गठजोड़ है, तो कहीं प्रदेश स्तर पर नेताओं और अपराधियों की साठगांठ है. राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मा़फिया उन पत्रकारों पर नज़र रखे हुए है, जिनकी क़लम पैनी और सख्त है. पत्रकारिता एक ऐसा पेशा है, जिसे समाज और आम लोगों ने मान्यता और इज़्ज़त दी है. संविधान में कहीं नहीं लिखा है कि पत्रकारिता देश का चौथा खंभा है. इसे जन मान्यता मिली हुई है. न ही कहीं यह लिखा हुआ है और न ही ऐसा कोई नियम है कि पत्रकार किसी को कहीं भी रोक सकता है, लेकिन जनमानस ने समाज में पत्रकारों को यह हक़ दिया है कि वह कहीं भी किसी को रोककर सवाल पूछ सकता है. पत्रकार की यह समानता कोई दूसरा वर्ग या किसी दूसरे पेशे से जु़डा व्यक्ति नहीं कर सकता है. पत्रकार चाहे तो किसी भी ज़िलाधिकारी या मंत्री को रोककर, कह सकता है कि मैं अमुक अख़बार या पत्रिका का संवाददाता हूं, मुझे आपसे सवाल पूछना है. वह आदमी रुकेगा और वह कह सकता है कि मैं इस सवाल का जवाब नहीं दूंगा, लेकिन ऐसा नहीं है. हो सकता है कि वह बिना रुके और अनसुना करके भी चला जाए. यह ताक़त पत्रकारों को समाज ने दी है. समाज ने ही पत्रकारों को यह भी ताक़त दी है कि वे इस लोकतंत्र को चलाने वाले चौथे खंभे के रूप में जाने जाएं. जनता के किसी वर्ग को जब अपनी समस्याओं का समाधान नहीं मिलता, या किसी नेता या प्रशासन के अधिकारी के सामने उसकी सुनवाई नहीं होती है तो उसके सामने स़िर्फ एक रास्ता बचता है कि वह किसी पत्रकार या अख़बार वालों के पास जाए और अपनी समस्या बताए.

आज भी लोगों की समस्याएं सुनने वाले पत्रकार हैं, जो उन्हें अपने अख़बार या अपनी पत्रिका में जगह देते हैं. इसलिए पत्रकारिता के पेशे का सम्मान जनता के मन में बहुत ज़्यादा है. लोग आपस में कहते भी हैं कि अगर हमारी कहीं भी सुनवाई नहीं होगी या अगर आप हमारी बात नहीं सुनेंगे तो हम अख़बार वालों के पास चले जाएंगे. अ़खबार में प्रकाशित जन समस्याओं पर सरकार और प्रशासन कार्यवाही भी करता है. आज भी अख़बारों में छपी रिपोर्ट पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट संज्ञान लेता है और अपनी तऱफ से नोटिस भी जारी करता है.

जेडे की मौत एक ऐसे पत्रकार की शहादत है, जो बड़ा क्राइम रिपोर्टर था, लेकिन उसके पास भी मोटरसाइकिल थी. वह चाहते तो कहीं से भी समझौता करके अपने लिए मुंबई में अच्छी सुविधाएं जुटा सकते थे, लेकिन जेडे ने ऐसा नहीं किया. जेडे की मौत भी मोटरसाइकिल पर चलते हुए उन लोगों की वजह से हुई, जो सही पत्रकारिता से बुरी तरह घबरा जाते हैं. इसमें कोई पुलिस अधिकारी शामिल है, पता नहीं. इसमें कोई अंडरवर्ल्ड शामिल है, पता नहीं. जेडे की हत्या की जांच कहीं पहुंच भी पाएगी, पता नहीं, क्योंकि इतने सारे पत्रकार जिन्हें दुख हुआ है, वे भी रोज़ी रोटी के काम में थोड़े दिनों में लग जाएंगे और जेडे का नाम स़िर्फ यादों में रह जाएगा. लगता है कि उनके हत्यारों की तलाश को लेकर पड़ने वाला दबाव भी थोड़े दिनों में कम हो जाएगा, लेकिन जेडे जैसी माैत और जेडे जैसी पत्रकारिता करने वाले लोग समाज में हमेशा इज़्ज़त की निगाहों से देखे जाएंगे. पत्रकारिता के पेशे की यही क़ीमत है.

डॉक्टर के बारे में कहा जाता है कि वह अपने मरीज़ों के लिए 24 घंटे उपलब्ध रहेगा. बहुत सारे लोग नहीं रहते हैं, लेकिन यह सच नहीं है. सच वह डॉक्टर है जो 24 घंटे अपने मरीज़ों के लिए उपलब्ध रहता है. पुलिस के पेशे की क़ीमत है 24 घंटे क़ानून व्यवस्था के ऊपर नज़र बनाए रखे. फौज की क़ीमत है 24 घंटे अपने सीने पर गोली खाने के लिए तैयार रहे. फायर ब्रिगेड के पेशे की क़ीमत है 24 घंटे आग से जूझने के लिए तैयार रहे. वहां न बीमारी का बहाना चलता है और न ही तबीयत ख़राब होने का. पत्रकारिता के पेशे की क़ीमत है अपनी जान. जेडे की मौत ने इसे साबित किया है. जिन लोगों को पत्रकारिता के पेशे में आना है, उन्हें इस सबक़ को दोबारा याद करना चाहिए. वे पीआर जर्नलिज़्म करने वालों की सेना में शामिल हो जाएं या फिर सही पत्रकारिता करने वाले लोगों के पदचिन्हों पर चलें और अगर सही पत्रकारिता करने वालों के पदचिन्हों पर चलना है तो इ़ज़्ज़त मिलेगी, सम्मान मिलेगा, लोगों का प्यार मिलेगा. हो सकता है कहीं से कोई गोली भी मिल जाए. जेडे को हम सच्ची श्रद्धांजलि देते हैं और जेडे से यह वादा करते हैं कि हम उस क़तार में हमेशा बने रहेंगे, जो सच्ची पत्रकारिता की पक्षधर है.

- संतोष भारतीय

प्रमुख संपादक चौथी दुनिया (हिंदी का पहला साप्ताहिक अख़बार) भारतीय भारत के शीर्ष दस पत्रकारों में गिने जाते हैं.