मंगलवार, 21 जून 2011


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक और आध्य सरसंघचालक परम पूजनीय डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी की ७० वी. पुण्यतिथि (२१ जून १९४० ) पर शत शत नमन.

शनिवार, 18 जून 2011


हमारी सरकार है, हम तो ऐसा ही करेंगे...?

पूरे विश्व में जनता का क्रोध,ज्वालमुखी की तरह धधक रहा है, कहीं राजतंत्र के खिलाफ आक्रोश है, तो कहीं जोड़-तोड़ करके प्रजातंत्र चला रहे सरकार के खिलाफ। जनता का आक्रोश जब-जब फूटा है, उसने भ्रष्टाचारी और जनता का हित नहीं देखने वाले तानाशाहों और नेताओं को उखाड़ फेंका है। चलो विश्व को छोडक़र अपने भारत वर्ष की महाभारत के विषय में बात करें जो कि पिछले कई महिनों से चल रहा हैं पहले अन्ना हजारे ने भ्रष्टचार के खिलाफ जो शंखनाद किया उसकी ध्वनि अभी देश में गूंज ही रही थी कि काला धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ योग सिखाने वाले बाबा रामदेव ने रामलीला मैदान पर जब अपना रौद्र रूप दिखाया तो सरकार चारों खाने चित होती नजर आई।

बाबा द्वारा जब रामलीला मैदान पर जनता के साथ अपनी लीला दिखाई तो पूरी सरकार पट्टरियों पर भागती नजर आ रही थी, उसे समझ में ही नहीं आ रहा था कि बाबा पर कैसे ब्रेक लगाएं और अपनी सरकार संकट से कैसे बचाएँ। फिर वही हुआ जो सत्ताधारी दल और उसमें बैठे राजनीतिज्ञ योद्धाओं ने अपने पासें फेंकना शुरू किया केंद्रीय मंत्रियों का बाबा से एयरपोर्ट पर मिलने जाना, फाइव स्टार होटल में बैठकर चिट्टी-पत्री करना और जिस प्रकार मध्यरात्रि में सरकार ने अपना काला चेहरा दिखाया वह दहलाने वाला था।

दिनभर गर्मी और दूर-दूराज राज्यों से आई जनता जब आराम कर रही थी, जब 5 हजार पुलिसकर्मियों ने बलपूर्वक लाठिया भंजनी शुरू कर दी, देखते ही देखते रामलीला मैदान को कुरूक्षेत्र बना दिया। यहां केवल घायलों की दर्द से कराहती आवाजें आ रही थी। पूरे विश्व ने यह नजारा देखा और कहा अरे भारत में भी ऐसा हो सकता है।

यह सबको पता था कि बाबा 4 जून को दिल्ली में यह सब करने वाले हैं। सरकार ने बाबा रामदेव की शाही आगवानी करने के लिए अपने चार विश्वसनीय मंत्रियों को हवाई अड्डे पहुंचकर बाबा का स्वागत करवाया और 72 घंटे बाद पुलिस द्वारा बलपूर्वक गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार का साथ देने वाली जनता पर लाठियां भांजकर उनका स्वागत किया।

रविवार, 5 जून 2011

श्रवण मावई को विमल पचौरी सम्मान


सीहोर जिले की प्रख्यात साहित्यिक संस्था द्वारा प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी 6 जून को स्वर्गीय विमल पचौरी सम्मान कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। आयोजन में नगर के प्रखर पत्रकार श्रवण मावई को विमल सम्मान से नवाजा जाएगा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से गौसंवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री के सलाहकार शिव चौबे और वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा एवं वर्किंग जर्नलिस्ट के प्रदेश अध्यक्ष राधा वल्लभ शारदा और दैनिक नवप्रभात के संपादक आदित्य नारायण उपाध्याय अतिथि के तौर पर उपस्थित रहेंगे।

सोमवार, 30 मई 2011

शनिवार, 21 मई 2011

‘पानीपत’ के आसार

विनीत दुबे सीहोर। नगरपालिका की लचर कार्य प्रणाली के चलते शहर में पेयजल का संकट लगातार गहराता जा रहा है। शनिवार को कांग्रेसी पार्षदों ने भूख हड़ताल प्रारंभ कर दी। वहीं भाजपा के पार्षद भी मुखर होने लगे हैं। शहर में टैंकरों से जलप्रदाय में लाखों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं।
नव गठित नगरपालिका शहर में व्यवस्थित पेयजल वितरण व्यवस्था करने में असफल साबित हो रही है। कांग्रेसी पार्षदों ने टैंकर से जलप्रदाय करने में मानमानी के आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल प्रारंभ कर दी है।
पार्षद राहुल यादव ने बताया कि नगरपालिका कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में पानी के टैंकर सप्लाई नहीं कर रही है नगरपालिका की इसी मनमानी के चलते भूख हड़ताल प्रारंभ की गई है।
चरणबद्ध होगा आंदोलन
22 मई को अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जाएगा, 23 मई को नपा के गेट पर मटके फोड़े जाएंगे, 24 मई को कांग्रेसी महिला पार्षद नपाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और प्रभारी सीएमओ दीपक देवगड़े को चूड़ियां भेंट करेंगी, वहीं 25 मई को नपाध्यक्ष, विधायक और सांसद का पुतला दहन किया जाएगा और 26 मई को रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक नगरपालिका अध्यक्ष और विधायक के निवास के बाहर नींद हराम आंदोलन चलाया जाएगा। इसके अलावा 15 जून को नगरपालिका के चार माह के काले घपलों का चिट्ठा जनता के सामने खोला जाएगा। आज शुरु हुए आंदोलन में कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैलाश परमार सहित अनेक कांग्रेसी नेता मौजूद थे।
भाजपाई भी असंतुष्ट
नगरपालिका में पार्षद अपनी उपेक्षा को लेकर अब आरपार के मूड में आ गए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार अध्यक्षीय परिषद में शामिल एक पार्षद अपनी उपेक्षा को लेकर खासे नाराज हैं। बताया जाता है कि नगरपालिका के अधिकारी व कर्मचारी और नपाध्यक्ष उनकी बात को महत्व नहीं देते हैं। इसी के चलते वे अध्यक्षीय परिषद (पीआईसी) से स्तीफा देने का मन बना चुके हैं। देर शाम तक उन्हे मनाने के प्रयास किए जा रहे थे।

शनिवार, 14 अगस्त 2010

स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएं

वन्दे मातरम
जो बरसों तक लड़े जेल में, उनकी याद करें।
जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें।

याद करें काला पानी को, अंग्रेज़ों की मनमानी को,
कोल्हू में जुट तेल पेरते, सावरकर से बलिदानी को।
याद करें बहरे शासन को, बम से थर्राते आसन को,
भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, के आत्मोत्सर्ग पावन को।
अन्यायी से लड़ें, दया की मत फरियाद करें।
उनकी याद करें।

याद करें हम पुर्तगाल को, ज़ुल्म सितम के तीस साल को,
फौजी बूटों तले क्रांति को, सुलगी चिनगारी विशाल को।
याद करें सालाज़ारों को, ज़ारों के अत्याचारों को,
साइबेरिया के निर्वासित, शिविरों के हाहाकारों को।
स्वतंत्रता के नए समर का शंख निनाद करें।
उनकी याद करें।

बलिदानों की बेला आई, लोकतन्त्र दे रहा दुहाई।
स्वाभिमान से वही जियेगा, जिससे कीमत गई चुकाई।
मुक्ति माँगती शक्ति संगठित, युक्ति सुसंगत, भक्ति अकम्पित,
कृति तेजस्वी, धृति हिमगिरि-सी, मुक्ति माँगती गति अप्रतिहत।
अंतिम विजय सुनिश्चित, पथ में क्यों अवसाद करें?
उनकी याद करें।
-श्री अटलबिहारी वाजपेयी
(मेरी इक्यावन कविताएँ से)

स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएं

वन्दे मातरम
जो बरसों तक लड़े जेल में, उनकी याद करें।
जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें।

याद करें काला पानी को, अंग्रेज़ों की मनमानी को,
कोल्हू में जुट तेल पेरते, सावरकर से बलिदानी को।
याद करें बहरे शासन को, बम से थर्राते आसन को,
भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, के आत्मोत्सर्ग पावन को।
अन्यायी से लड़ें, दया की मत फरियाद करें।
उनकी याद करें।

याद करें हम पुर्तगाल को, ज़ुल्म सितम के तीस साल को,
फौजी बूटों तले क्रांति को, सुलगी चिनगारी विशाल को।
याद करें सालाज़ारों को, ज़ारों के अत्याचारों को,
साइबेरिया के निर्वासित, शिविरों के हाहाकारों को।
स्वतंत्रता के नए समर का शंख निनाद करें।
उनकी याद करें।

बलिदानों की बेला आई, लोकतन्त्र दे रहा दुहाई।
स्वाभिमान से वही जियेगा, जिससे कीमत गई चुकाई।
मुक्ति माँगती शक्ति संगठित, युक्ति सुसंगत, भक्ति अकम्पित,
कृति तेजस्वी, धृति हिमगिरि-सी, मुक्ति माँगती गति अप्रतिहत।
अंतिम विजय सुनिश्चित, पथ में क्यों अवसाद करें?
उनकी याद करें।
-श्री अटलबिहारी वाजपेयी
(मेरी इक्यावन कविताएँ से)