सोमवार, 30 मई 2011

शनिवार, 21 मई 2011

‘पानीपत’ के आसार

विनीत दुबे सीहोर। नगरपालिका की लचर कार्य प्रणाली के चलते शहर में पेयजल का संकट लगातार गहराता जा रहा है। शनिवार को कांग्रेसी पार्षदों ने भूख हड़ताल प्रारंभ कर दी। वहीं भाजपा के पार्षद भी मुखर होने लगे हैं। शहर में टैंकरों से जलप्रदाय में लाखों के वारे-न्यारे किए जा रहे हैं।
नव गठित नगरपालिका शहर में व्यवस्थित पेयजल वितरण व्यवस्था करने में असफल साबित हो रही है। कांग्रेसी पार्षदों ने टैंकर से जलप्रदाय करने में मानमानी के आरोप लगाते हुए भूख हड़ताल प्रारंभ कर दी है।
पार्षद राहुल यादव ने बताया कि नगरपालिका कांग्रेस पार्षदों के वार्डों में पानी के टैंकर सप्लाई नहीं कर रही है नगरपालिका की इसी मनमानी के चलते भूख हड़ताल प्रारंभ की गई है।
चरणबद्ध होगा आंदोलन
22 मई को अर्द्धनग्न होकर प्रदर्शन किया जाएगा, 23 मई को नपा के गेट पर मटके फोड़े जाएंगे, 24 मई को कांग्रेसी महिला पार्षद नपाध्यक्ष नरेश मेवाड़ा और प्रभारी सीएमओ दीपक देवगड़े को चूड़ियां भेंट करेंगी, वहीं 25 मई को नपाध्यक्ष, विधायक और सांसद का पुतला दहन किया जाएगा और 26 मई को रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक नगरपालिका अध्यक्ष और विधायक के निवास के बाहर नींद हराम आंदोलन चलाया जाएगा। इसके अलावा 15 जून को नगरपालिका के चार माह के काले घपलों का चिट्ठा जनता के सामने खोला जाएगा। आज शुरु हुए आंदोलन में कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैलाश परमार सहित अनेक कांग्रेसी नेता मौजूद थे।
भाजपाई भी असंतुष्ट
नगरपालिका में पार्षद अपनी उपेक्षा को लेकर अब आरपार के मूड में आ गए हैं। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार अध्यक्षीय परिषद में शामिल एक पार्षद अपनी उपेक्षा को लेकर खासे नाराज हैं। बताया जाता है कि नगरपालिका के अधिकारी व कर्मचारी और नपाध्यक्ष उनकी बात को महत्व नहीं देते हैं। इसी के चलते वे अध्यक्षीय परिषद (पीआईसी) से स्तीफा देने का मन बना चुके हैं। देर शाम तक उन्हे मनाने के प्रयास किए जा रहे थे।

शनिवार, 14 अगस्त 2010

स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएं

वन्दे मातरम
जो बरसों तक लड़े जेल में, उनकी याद करें।
जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें।

याद करें काला पानी को, अंग्रेज़ों की मनमानी को,
कोल्हू में जुट तेल पेरते, सावरकर से बलिदानी को।
याद करें बहरे शासन को, बम से थर्राते आसन को,
भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, के आत्मोत्सर्ग पावन को।
अन्यायी से लड़ें, दया की मत फरियाद करें।
उनकी याद करें।

याद करें हम पुर्तगाल को, ज़ुल्म सितम के तीस साल को,
फौजी बूटों तले क्रांति को, सुलगी चिनगारी विशाल को।
याद करें सालाज़ारों को, ज़ारों के अत्याचारों को,
साइबेरिया के निर्वासित, शिविरों के हाहाकारों को।
स्वतंत्रता के नए समर का शंख निनाद करें।
उनकी याद करें।

बलिदानों की बेला आई, लोकतन्त्र दे रहा दुहाई।
स्वाभिमान से वही जियेगा, जिससे कीमत गई चुकाई।
मुक्ति माँगती शक्ति संगठित, युक्ति सुसंगत, भक्ति अकम्पित,
कृति तेजस्वी, धृति हिमगिरि-सी, मुक्ति माँगती गति अप्रतिहत।
अंतिम विजय सुनिश्चित, पथ में क्यों अवसाद करें?
उनकी याद करें।
-श्री अटलबिहारी वाजपेयी
(मेरी इक्यावन कविताएँ से)

स्वतंत्रता दिवस की शुभ कामनाएं

वन्दे मातरम
जो बरसों तक लड़े जेल में, उनकी याद करें।
जो फाँसी पर चढ़े खेल में, उनकी याद करें।

याद करें काला पानी को, अंग्रेज़ों की मनमानी को,
कोल्हू में जुट तेल पेरते, सावरकर से बलिदानी को।
याद करें बहरे शासन को, बम से थर्राते आसन को,
भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, के आत्मोत्सर्ग पावन को।
अन्यायी से लड़ें, दया की मत फरियाद करें।
उनकी याद करें।

याद करें हम पुर्तगाल को, ज़ुल्म सितम के तीस साल को,
फौजी बूटों तले क्रांति को, सुलगी चिनगारी विशाल को।
याद करें सालाज़ारों को, ज़ारों के अत्याचारों को,
साइबेरिया के निर्वासित, शिविरों के हाहाकारों को।
स्वतंत्रता के नए समर का शंख निनाद करें।
उनकी याद करें।

बलिदानों की बेला आई, लोकतन्त्र दे रहा दुहाई।
स्वाभिमान से वही जियेगा, जिससे कीमत गई चुकाई।
मुक्ति माँगती शक्ति संगठित, युक्ति सुसंगत, भक्ति अकम्पित,
कृति तेजस्वी, धृति हिमगिरि-सी, मुक्ति माँगती गति अप्रतिहत।
अंतिम विजय सुनिश्चित, पथ में क्यों अवसाद करें?
उनकी याद करें।
-श्री अटलबिहारी वाजपेयी
(मेरी इक्यावन कविताएँ से)

मंगलवार, 27 जुलाई 2010

189 लोगों ने गरीबी से तंग आकर मौत को गले लगाया

विनीत दुबे / स्वयं को गरीबों की हितैषी बताने वाली राज्य सरकार के पिछले साढ़े तीन साल के कार्यकाल में राज्य के 189 लोगों ने गरीबी से तंग आकर मौत को गले लगा लिया। दूसरी तरफ सरकार के रोजगार के लाखों अवसर मुहैया कराने के दावों की पोल 128 बेरोजगारों ने जान देकर खोल दी।
प्रदेश में बीते साढ़े तीन साल में 34 हजार 446 लोगों ने अलग-अलग कारणों के चलते आत्महत्या की। इस अवधि में ही पुलिस हिरासत में 23 लोगों ने दम तोड़ दिया। इनमें एक दर्जन ने पुलिस हिरासत के दौरान सुसाइड किया। पुलिस रिकार्ड के अनुसार एक जनवरी 07 से 15 जून 2010 के बीच हुई खुदुकुशी में से 6978 मामलों में वजह पता नहीं चली। सर्वाधिक लोगों ने बीमारी की वजह से सुसाइड किया। खुदकुशी की दूसरी बड़ी वजह पारिवारिक कलह बनी। तीसरे नंबर पर दहेज प्रताड़ना और चौथे नंबर पर नशे की लत ने लोगों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया। यह जानकारी विधानसभा में गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता ने रामनिवास रावत के लिखित सवाल के जवाब में दी।
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सुसाइड का कारण संख्या
बीमारी 5114
परिवार में झगड़े 4309
दहेज 2377
नशा 1666
प्रेम संबंध 507
परीक्षा में फेल 429
अवैध संबंध 319
बदनामी 291
संपत्ति विवाद 250
संतानहीनता 200
व्यवसाय और नौकरी में परेशानी 183
दिवालियापन 178
विवाह टूटना 144
शरीरिक शोषण 117
अवैध गर्भ धारण 58
तलाक 20
अन्य कारण 6978
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